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BNS Section 355 in Hindi – शराब पीकर उत्पात करने की बीएनएस धारा में सजा और जमानत
जो कोई नशे की हालत में किसी सार्वजनिक स्थान पर या किसी ऐसे स्थान पर जहां प्रवेश करना उसके लिए अतिचार माना जाएगा, उपस्थित होगा और वहां इस प्रकार आचरण करेगा जिससे किसी व्यक्ति को क्षोभ हो, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि चौबीस घंटे तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, या सामुदायिक सेवा से, दंडित किया जाएगा।
BNS Section 355 in English
Whoever, in a state of intoxication, appears in any public place, or in any place which it is a trespass in him to enter, and there conducts himself in such a manner as to cause annoyance to any person, shall be punished with simple imprisonment for a term which may extend to twenty-four hours, or with fine which may extend to one thousand rupees, or with both or with community service.
BNSS Classification
- Simple imprisonment for 24 hours, or fine of 1,000 rupees, or both or with community service.
- Non-cognizable
- Bailable
- Triable by Any Magistrate.
BNS Section 355 in Hindi – शराब पीकर उत्पात करने की बीएनएस धारा में सजा और जमानत
हम सभी चाहते हैं कि हमारे आस-पास का वातावरण शांतिपूर्ण और सुरक्षित हो। लेकिन कई बार कुछ लोग, विशेष रूप से नशे की हालत में, सार्वजनिक स्थलों पर ऐसा आचरण करने लगते हैं जिससे न केवल सामाजिक अनुशासन भंग होता है, बल्कि अन्य लोगों की सुरक्षा और मानसिक शांति भी प्रभावित होती है।
ऐसे मामलों में, कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ता है। भारतीय दंड संहिता (IPC) की पुरानी धारा 510 के स्थान पर अब भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita – BNS) की धारा 355 को लागू किया गया है, जो नशे में धुत होकर सार्वजनिक स्थानों पर अनुचित व्यवहार करने वालों पर कार्रवाई करने का अधिकार देती है।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि बीएनएस धारा 355 क्या है, इसके अंतर्गत कौन-कौन से कार्य अपराध माने जाते हैं, क्या सजा मिल सकती है, और इस धारा के अंतर्गत जमानत मिलने की प्रक्रिया क्या है।
⚖️ BNS Section 355 in Hindi क्या कहती है? | BNS Section 355 Explained
BNS की धारा 355 के अनुसार:
“यदि कोई व्यक्ति शराब या किसी नशीले पदार्थ के प्रभाव में किसी सार्वजनिक स्थान पर ऐसा कोई कार्य करता है जिससे वहाँ मौजूद अन्य लोगों को असुविधा, असुरक्षा या मानसिक कष्ट हो, तो उसे इस धारा के अंतर्गत दंडित किया जा सकता है।”
यह धारा उन सभी मामलों पर लागू होती है जहाँ कोई व्यक्ति:
- नशे की हालत में हो।
- किसी सार्वजनिक या निषिद्ध स्थल पर हो।
- अपने आचरण से वहाँ उपस्थित लोगों को असुविधा, अपमान, डर या खतरा महसूस करवाए।
🧾 BNS Section 355 in Hindi के अंतर्गत अपराध माने जाने वाले आचरण
नीचे दिए गए कुछ कार्य ऐसे हैं जिन्हें BNS 355 के अंतर्गत अपराध माना जा सकता है:
- शराब पीकर सड़कों पर चिल्लाना या मारपीट करना
- सार्वजनिक पार्कों या रेलवे स्टेशन में गाली-गलौज या हंगामा करना
- बाजार में लोगों से उलझना या किसी के साथ दुर्व्यवहार करना
- बस स्टैंड या सार्वजनिक स्थानों पर अनुचित हरकतें करना
- नशे की हालत में लोगों को डराना या अपशब्द बोलना
- सार्वजनिक शौचालयों में तोड़फोड़ करना या उत्पात मचाना
- नशे में रास्ता रोक कर सो जाना जिससे यातायात बाधित हो
📖 सरल उदाहरण से समझें BNS Section 355 in Hindi
उदाहरण: रमेश और सुरेश अच्छे मित्र हैं। रमेश ने एक दिन अपने दोस्तों के साथ पार्टी की और अत्यधिक शराब का सेवन कर लिया। पार्टी के बाद वह नशे में धुत होकर सड़क पर आ गया और जोर-जोर से चिल्लाने, गाने और राहगीरों से उलझने लगा।
रात का समय था, कॉलोनी के लोग सो रहे थे लेकिन रमेश की आवाज और हरकतों से शांति भंग हो गई। लोगों ने पुलिस को बुलाया, जिसने रमेश को हिरासत में लिया और BNS धारा 355 के अंतर्गत मामला दर्ज किया।
🔒 BNS Section 355 के तहत सजा का प्रावधान
इस धारा के अंतर्गत दोषी व्यक्ति को निम्नलिखित सजा दी जा सकती है:
- साधारण कारावास, अधिकतम 24 घंटे तक
- जुर्माना, ₹10 से ₹1000 तक
- या दोनों सजा एक साथ
इसके अतिरिक्त, न्यायालय दोषी को समाज सेवा (Community Service) का आदेश भी दे सकता है, जिसमें:
- सार्वजनिक स्थलों की सफाई
- वृद्धाश्रम में सेवा
- सामुदायिक केंद्रों में सहयोग देना शामिल हो सकता है
यह सजा न केवल दंड देने का माध्यम है, बल्कि व्यक्ति को सामाजिक जिम्मेदारी का एहसास कराने का भी एक तरीका है।
📝 जमानत और गिरफ्तारी के प्रावधान | Bail Under BNS 355
बीएनएस की धारा 355 के अंतर्गत:
- यह एक जमानती अपराध (Bailable Offence) है, यानी आरोपी को पुलिस स्टेशन से ही जमानत मिल सकती है।
- यह असंज्ञेय अपराध (Non-Cognizable Offence) है, अर्थात पुलिस बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के गिरफ्तारी नहीं कर सकती।
इसलिए यदि कोई व्यक्ति गलती से या पहली बार इस प्रकार की स्थिति में फँस जाता है, तो उसे आसानी से जमानत मिल सकती है। हालांकि, दोहराव या गंभीर उत्पात की स्थिति में न्यायालय जमानत की शर्तें कड़ी कर सकता है।
👨⚖️ Advocate Sudhir Rao की सलाह:
बीएनएस धारा 355 एक हल्की लेकिन संवेदनशील कानूनी धारा है। कई बार पुलिस इस धारा का प्रयोग कर प्रारंभिक कार्यवाही के रूप में आरोपी को काबू में लाने के लिए करती है, ताकि समाज में शांति बनी रहे। लेकिन अगर मामला बढ़ जाए या व्यक्ति की कोई पुरानी रिकॉर्ड हो, तो यह आपके ऊपर अन्य धाराएं भी लागू कर सकती है।
ऐसे मामलों में, एक अनुभवी वकील जैसे Advocate Sudhir Rao की राय लेना अत्यंत आवश्यक है, जो कानून की बारीकियों को समझते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि आपके अधिकार सुरक्षित रहें और आपको अनुचित रूप से दंडित न किया जाए।
📌 निष्कर्ष:
BNS Section 355 का उद्देश्य सिर्फ दंड देना नहीं है, बल्कि सामाजिक अनुशासन को बनाए रखना भी है। शराब या नशे में उत्पात करने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए यह धारा एक जरूरी कानूनी उपाय है। यदि आप या आपके जानने वाले किसी ऐसे केस में फँस जाएँ, तो घबराएं नहीं — कानूनी सलाह लें, शांतिपूर्वक जमानत प्रक्रिया अपनाएं और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचें।
अगर आप इस धारा के अंतर्गत जारी किसी नोटिस, केस या पुलिस कार्रवाई से परेशान हैं, तो Advocate Sudhir Rao से सलाह जरूर लें, जिनका अनुभव और कानूनी समझ आपको सुरक्षित निकालने में मदद कर सकता है।


